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March 18, 2026 11:08 pm

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जनपद पंचायत पाली में डीएमएफ योजना पर सवाल, करोड़ों की राशि खर्च होने पर उठे संदेहपूर्व जनपद सदस्य ने कलेक्टर से की उच्च स्तरीय जांच की मांग

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Ravi Thakur

जांच पूरी होने तक सीईओ के स्थानांतरण की अपील

कोरबा/पाली।
कोरबा जिले के जनपद पंचायत पाली में डीएमएफ योजना के तहत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और हितग्राही सामग्री वितरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व जनपद सदस्य मिर्जा कय्यूम बेग ने इन योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्य न होने का आरोप लगाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
पूर्व जनपद सदस्य ने इस संबंध में कलेक्टर कोरबा को दोबारा पत्र सौंपकर कहा है कि डीएमएफ योजना के अंतर्गत बीते तीन वर्षों में प्रशिक्षण एवं सामग्री वितरण के नाम पर भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई, लेकिन संबंधित गतिविधियां कहीं भी दिखाई नहीं देतीं। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही अथवा गंभीर अनियमितता का मामला बताया है।
श्री बेग के अनुसार डीएमएफ योजना के तहत वर्ष 2020-21 में लगभग ₹1.89 करोड़, वर्ष 2021-22 में ₹5.83 करोड़ तथा वर्ष 2022-23 में ₹7.18 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई। कुल मिलाकर लगभग ₹15 करोड़ रुपये केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं हितग्राहियों को सामग्री वितरण के नाम पर खर्च दर्शाया गया है। आरोप है कि न तो प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन हुआ और न ही हितग्राहियों को सामग्री का वास्तविक वितरण किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि इन कार्यों की जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किए थे। नियमानुसार निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद भी उन्हें आज तक संबंधित दस्तावेज अथवा जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।
पूर्व जनपद सदस्य ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि यदि जांच प्रक्रिया के दौरान संबंधित अधिकारी उसी पद पर बने रहते हैं, तो निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण उन्होंने जांच पूर्ण होने तक जनपद पंचायत पाली के सीईओ को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है।
उधर, जनपद पंचायत पाली में पहले से ही प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में करोड़ों रुपये से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद शासन-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस प्रकरण में क्या जांच के आदेश दिए जाते हैं या मामला केवल पत्राचार तक ही सीमित रह जाएगा।

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