कोटा/छत्तीसगढ़ — उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत समानता के नाम पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 13 जनवरी 2026 से लागू नए नियमों के विरोध में राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ ने मोर्चा खोल दिया है। महासभा ने इन नियमों को सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों व प्राध्यापकों के अधिकारों पर कुठाराघात बताते हुए आज कोटा में अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपने का ऐलान किया है।
महासभा का कहना है कि नए नियमों के तहत बिना ठोस जांच के आरोपों में फंसाए जाने की आशंका बनी हुई है। आरोप सिद्ध होने से पहले ही एकतरफा कार्रवाई, पक्ष रखने का अवसर न मिलना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी—इन सबके कारण यह व्यवस्था अव्यवहारिक और पक्षपातपूर्ण प्रतीत होती है।
“समानता के नाम पर अन्याय नहीं”
महासभा ने स्पष्ट किया कि जातिगत भेदभाव समाप्त करना आवश्यक है, लेकिन इसके नाम पर सामान्य वर्ग को पहले से दोषी मानना न्यायोचित नहीं। यदि आरोप सिद्ध नहीं होते, तब भी संबंधित छात्र या शिक्षक को सामाजिक व शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़े—यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।
आर्थिक संशोधन की प्रमुख मांगें
महासभा ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि नियमों में आर्थिक संशोधन कर—
विद्यार्थियों व शिक्षकों को पूरा और निष्पक्ष पक्ष रखने का अवसर दिया जाए
झूठे आरोपों की स्थिति में सम्मानजनक बचाव की व्यवस्था हो
दोष सिद्ध होने पर ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
महासभा ने चेताया कि यदि सामान्य वर्ग के हितों की अनदेखी जारी रही, तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।