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December 1, 2025 5:07 am

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सरकारी स्कूल की 70 टेबल–बेंच निजी संस्था को दान!तत्कालीन DEO व प्राचार्य पर नियम विरुद्ध वितरण का आरोप

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Ravi Thakur

तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी व प्राचार्य ललित शास्त्री के आदेश पर सरकारी संपत्ति निजी संस्था को दान ,शिक्षा मंत्री व प्रधानमंत्री से की जाएगी शिकायत

रतनपुर। धार्मिक व पौराणिक नगरी रतनपुर में सरकारी संपत्ति के मनमाने उपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय रतनपुर में रखी 70 नग टेबल–बेंच को बिना किसी आधिकारिक सूचना, प्रक्रिया और मापदंड के निजी संस्था को दान कर देने का खुलासा सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से हुआ है।मामला तब प्रकाश में आया जब प्रधान पाठक अनिल शर्मा ने RTI के जवाब में बताया कि यह फर्नीचर तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी और प्राचार्य ललित शास्त्री के आदेश पर श्रीनिवास संस्कृत महाविद्यालय बिलासपुर को दिया गया।

कैसे हुआ सरकारी फर्नीचर का ‘दान’?

RTI पर मिली जानकारी के अनुसार, 28 मई 2025 को श्रीनिवास संस्कृत महाविद्यालय ने जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर से छात्रों हेतु टेबल–बेंच की मांग की थी।
इस पर तत्कालीन DEO ने रतनपुर स्थित स्वामी आत्मानंद विद्यालय में रखे “अतिरिक्त फर्नीचर” को निजी संस्था को प्रदान करने का आदेश दे दिया।प्राचार्य के निर्देश पर प्रधान पाठक अनिल शर्मा ने 13 जून 2025 को 35 टेबल और 35 बेंच संबंधित संस्था को सौंप दीं।

न पत्राचार, न अनुमति—सब कुछ आदेश पर!

प्रधान पाठक ने लिखित में स्वीकार किया है कि:
उन्होंने केवल उच्च अधिकारियों के आदेश का पालन किया,कोई पालन प्रतिवेदन विभाग को नहीं भेजा,न ही किसी प्रकार का पत्राचार किया गया।यह साफ संकेत देता है कि प्रक्रिया पूरी तरह औपचारिकताओं से बग़ैर निभाई गई।

सबसे बड़ा सवाल—सरकारी संपत्ति दान करने का अधिकार किसे?

सूत्रों और RTI जानकारी के अनुसार:न तो शासन की ओर से कोई मापदंड लागू किया गया,न ही सरकारी संपत्ति निजी संस्था को दान करने का कोई लिखित प्रावधान बताया गया।
अब यह गंभीर सवाल उठता है कि तत्कालीन DEO अनिल तिवारी और प्राचार्य ललित शास्त्री को किस नियम के तहत सरकारी टेबल–बेंच निजी संस्था को दान में देने का अधिकार मिला?

शिक्षा मंत्री व प्रधानमंत्री से होगी शिकायत

स्थानीय नागरिकों व जनप्रतिनिधियों ने इस मामले को बड़ी अनियमितता बताते हुए कहा है कि सरकारी संपत्ति का इस प्रकार दान किया जाना न केवल नियम विरुद्ध है बल्कि यह शासकीय संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
मामले की शिकायत जल्द ही छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी।

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