रतनपुर।
छत्तीसगढ़ की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले माघी पूर्णिमा आदिवासी विकास मेले को लेकर इस बार श्रद्धा से ज़्यादा सियासत की गूंज सुनाई दे रही है। केंद्र, राज्य और नगर—तीनों स्तरों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने के बावजूद रतनपुर नगर पालिका द्वारा किए गए मंच संचालन के निर्णय ने स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं, सनातनी हिंदू संगठनों और आम नागरिकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन ने जानबूझकर मंच संचालन की जिम्मेदारी कांग्रेस समर्थित व्यक्ति को सौंपकर उसे असामान्य और प्रमुख भूमिका में प्रस्तुत किया, जबकि वर्षों से धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े भाजपा एवं सनातनी संगठनों के प्रतिनिधियों को केवल औपचारिक सूची तक सीमित कर दिया गया।
यह मेला केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी परंपराओं, सनातन संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ पर्व है। ऐसे में मंच से जुड़े निर्णय को लेकर उठे सवालों ने नगर पालिका की नीयत पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
भाजपा समर्थकों का कहना है कि जब प्रदेश में ट्रिपल इंजन सरकार का दावा किया जा रहा है, तब भी यदि कांग्रेस से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जाती है, तो यह न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने वाला है, बल्कि जनता के बीच गलत राजनीतिक संदेश भी देता है।
सूत्रों की मानें तो मंच संचालन सूची में भाजपा व सनातनी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों के नाम केवल दिखावटी तौर पर शामिल किए गए, जबकि वास्तविक संचालन और प्रभाव पूरी तरह एक ही पक्ष के हाथ में रहा। इस उपेक्षा से कार्यकर्ताओं में अंदर ही अंदर आक्रोश की आग सुलग रही है, जो आने वाले दिनों में खुलकर सामने आ सकती है।
अब सवाल यह है कि—
क्या नगर पालिका प्रशासन ने राजनीतिक संतुलन साधने के नाम पर अपने ही समर्थकों की अनदेखी कर दी?या फिर यह निर्णय किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था?
फिलहाल माघी पूर्णिमा मेला जहां श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है, वहीं मंच संचालन को लेकर उठा यह विवाद रतनपुर की राजनीति में नई ।