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March 19, 2026 7:38 am

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सोमनाथ से रतनपुर तक स्वाभिमान की गूंज: बूढ़ा महादेव मंदिर बना सनातन चेतना का साक्षी

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Ravi Thakur

रतनपुर
जब-जब सनातन पर आघात हुआ, तब-तब आस्था और अधिक प्रखर होकर खड़ी हुई।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर 1026 ईस्वी में हुए आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने पर मनाया जा रहा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व इसी अटूट विश्वास, शौर्य और पुनर्जागरण की जीवंत मिसाल है।
8 से 11 जनवरी तक चल रहे इस राष्ट्रीय पर्व के अंतर्गत देश के कोने-कोने में आस्था, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े कार्यक्रम हो रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की धार्मिक राजधानी रतनपुर स्थित प्राचीन बूढ़ा महादेव मंदिर (वृद्धेश्वरनाथ महादेव) में भावविभोर वातावरण में विधिवत पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।


पूजन कार्यक्रम में नगरपालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप, भाजपा रतनपुर मंडल के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भगवान भोलेनाथ को जलाभिषेक के साथ सामूहिक ॐकार जाप किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और सनातन चेतना से गूंज उठा।
यह पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि राष्ट्र की आत्मा, सांस्कृतिक एकता और स्वाभिमान के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक बन गया। श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ से क्षेत्र की सुख-समृद्धि के साथ देश की अखंडता और सांस्कृतिक चेतना के संरक्षण की प्रार्थना की।
हजार वर्षों बाद भी अक्षुण्ण है आस्था
स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध बूढ़ा महादेव मंदिर, जो रतनपुर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान का आधार है, इस अवसर पर विशेष रूप से सुसज्जित रहा। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और भक्तों की आस्था ने यह स्पष्ट कर दिया कि
मंदिर तोड़े जा सकते हैं, पर विश्वास नहीं।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: संघर्ष से निर्माण तक की अमर गाथा
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व उस ऐतिहासिक सत्य का स्मरण है कि सोमनाथ मंदिर हर विध्वंस के बाद पहले से अधिक भव्य होकर खड़ा हुआ। यह पर्व पराजय का नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण, धैर्य और सांस्कृतिक विजय का उत्सव है।
देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न स्थानों पर ॐकार जाप, शौर्य यात्राएं और सांस्कृतिक आयोजन हो रहे हैं। रतनपुर के आयोजन में ज्वाला कौशिक, रामा जायसवाल, ज्ञानेंद्र कश्यप, अमित महावर, सुरेश सोनी, उषा चौहान, राजकुमारी बिसेन, प्रभा मानिकपुरी सहित अनेक कार्यकर्ता सम्मिलित हुए।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि
“सोमनाथ केवल मंदिर नहीं, भारत की आत्मा है—जो हर युग में अविचल खड़ी रहती है।”

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