
चांपी जलाशय में 10-12 वर्षीय मगरमच्छ की मौत, वन विभाग की जांच में हुआ बड़ा खुलासा
रतनपुर/कोटा। ग्राम पंचायत उमरिया दादर के आश्रित ग्राम पचरा स्थित चांपी जलाशय में मिले मृत मगरमच्छ मामले में वन विभाग की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मगरमच्छ की मौत बिजली का करंट लगने से होना पाया गया है। मामले में वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें 15 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
वन विभाग के अनुसार 14 जुलाई की सुबह ग्रामीणों से सूचना मिली कि चांपी जलाशय के डुबान क्षेत्र में एक विशाल मगरमच्छ मृत अवस्था में पानी में तैर रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर परीक्षण कराया। कानन पेंडारी के पशु चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन द्वारा किए गए शव परीक्षण में मगरमच्छ की मौत बिजली के करंट से होना प्रमाणित हुआ। मृत मगरमच्छ की उम्र लगभग 10 से 12 वर्ष तथा लंबाई 2.55 मीटर बताई गई है।
जांच के दौरान वन विभाग ने मुखबिरों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर पाया कि केवल दास मानिकपुरी और कंवल दास मानिकपुरी ने तालाब में मछलियों की सुरक्षा के नाम पर बिजली का तार बिछाकर मगरमच्छ का शिकार किया। आरोपियों ने तालाब किनारे लकड़ी की खूंटियां गाड़कर करीब 100 मीटर से अधिक लंबा विद्युत तार बिछाया था, जिसकी चपेट में आने से मगरमच्छ की मौत हो गई। वन विभाग ने मौके से बिजली का तार भी जब्त कर लिया।
वन विभाग ने मगरमच्छ अनुसूची-1 के संरक्षित वन्यजीव होने के कारण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 2(16)(ख), 9, 50 एवं 51 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
मुख्य वन संरक्षक मनोज पाण्डेय एवं वनमंडलाधिकारी नीरज के मार्गदर्शन में पूरी कार्रवाई की गई। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव को नुकसान न पहुंचाएं और यदि आबादी वाले क्षेत्र में वन्यजीव दिखाई दें तो इसकी तत्काल सूचना वन विभाग को दें।