
रतनपुर
नगर पालिका परिषद रतनपुर के चुनाव को लगभग दो वर्ष पूरे होने वाले हैं। इस दौरान भाजपा के लवकुश कश्यप नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। लेकिन इन दो वर्षों में नगर की राजनीति में सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस पार्षदों की निष्क्रियता को लेकर होती रही। नगर के चौक-चौराहों पर अक्सर यह सवाल उठता रहा कि आखिर विपक्ष की भूमिका निभाने वाले कांग्रेस पार्षद जनता की समस्याओं पर कभी मुखर क्यों नहीं हुए।

नगर में पेयजल संकट, सफाई व्यवस्था, बरसात में जलभराव, नालियों की सफाई और विकास कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रहीं, लेकिन विपक्ष की ओर से न तो कोई बड़ा आंदोलन हुआ और न ही कोई प्रभावी विरोध देखने को मिला। यही वजह रही कि आम लोगों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ती रही कि कांग्रेस पार्षद भाजपा नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नहीं बोल रहे हैं। हालांकि यह राजनीतिक आरोप और जनचर्चा का विषय रहा है।
अब करीब दो वर्ष बाद कांग्रेस के सभी पार्षदों ने एक साथ नगर पालिका में चार अलग-अलग आवेदन सौंपकर राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। आवेदन में जल आवर्धन योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा एवं भौतिक सत्यापन, बरसात पूर्व नालियों की सफाई नहीं कराए जाने, नगर में पेयजल संकट के समाधान तथा सफाई व्यवस्था के लिए नगर पालिका द्वारा खरीदी गई मशीनों की जानकारी मांगी गई है।

इतना ही नहीं, कांग्रेस पार्षदों ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
हालांकि इस चेतावनी के बाद भी नगर में सवालों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों का कहना है कि जिन समस्याओं को लेकर आज आंदोलन की बात की जा रही है, वे तो पिछले दो वर्षों से बनी हुई हैं। ऐसे में यदि विपक्ष वास्तव में जनता के हितों के लिए गंभीर था, तो अब तक उसने सड़क पर उतरकर संघर्ष क्यों नहीं किया? नगर में यह चर्चा भी है कि अचानक एक साथ चार आवेदन और आंदोलन की चेतावनी देना कहीं जनता के बीच अपनी राजनीतिक छवि सुधारने की कवायद तो नहीं है।

फिलहाल कांग्रेस पार्षदों की इस नई सक्रियता ने नगर की राजनीति को गरमा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी चेतावनी केवल आवेदन और बयान तक सीमित रहती है या वास्तव में विपक्ष नगरहित के मुद्दों पर जनआंदोलन खड़ा कर पाता है।